
गाजियाबाद में फिर ट्विन टावर कांड: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SVP Gulmohar Greens के 2 टावर गिराने का दिया आदेश, बिल्डर पर FIR
नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर के बाद अब गाजियाबाद में बड़ा एक्शन, अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट का हथौड़ा
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला – गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद की चर्चित सोसाइटी Gulmohar Greens में अवैध निर्माण को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की बेंच ने 27 अक्टूबर को दिए फैसले में SVP Group के पार्टनर फर्म Friends Land Developers द्वारा बनाई गई दो 10 मंजिला इमारतों को पूरी तरह ध्वस्त करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि ये निर्माण किसी भी हालत में कंपाउंडिंग योग्य नहीं हैं.
हाईकोर्ट के आदेश के 7 बड़े पॉइंट्स
आपकी इमेज में जो जानकारी है, कोर्ट ने उसी को विस्तार से आदेश में लिखा है:
1. 2 टावर पूरी तरह ध्वस्त: टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह गिराया जाएगा. इन दोनों टावरों में 5 फ्लोर पर 8-8 यूनिट यानी कुल 80 फ्लैट हैं, जो अभी तक बिके नहीं हैं.
2. 4 टावरों की 2-2 मंजिल हटेंगी: टावर नंबर 16, 17, 18 और 19 की 9वीं और 10वीं मंजिल को अवैध मानते हुए हटाने का निर्देश दिया गया है. ये मंजिलें बिना वैध नक्शे के बनाई गई थीं.
3. ध्वस्तीकरण का खर्च बिल्डर से वसूला जाएगा: तोड़फोड़ का पूरा खर्च प्रमोटर से वसूला जाएगा.
4. 25 लाख का जुर्माना: बिल्डर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे एक महीने के भीतर Gulmohar Greens Residents Welfare Association (GGRWA) के खाते में जमा करना होगा. कोर्ट ने कहा बिल्डर ने कॉमन एरिया बेचकर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की है.
5. GDA की भूमिका पर नाराजगी: कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की भूमिका पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि GDA के अधिकारी प्रमोटर से मिलीभगत कर रहे थे और 2011 और 2015 में गैरकानूनी कंपाउंडिंग को मंजूरी दी. संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं.
6. 2 सप्ताह में FIR: प्रमोटर के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत जानकारी देने और UP Apartment Act 2010 के उल्लंघन पर 2 सप्ताह के भीतर FIR दर्ज करने का आदेश. जांच एडिशनल कमिश्नर रैंक से नीचे के अधिकारी नहीं करेंगे.
7. याचिकाकर्ताओं को मुआवजा: याचिका दाखिल करने वाले 11 लोगों को न्यायिक खर्च के लिए GDA 50-50 हजार रुपये देगा, क्योंकि उन्हें GDA की लापरवाही से मुकदमेबाजी करनी पड़ी.
कैसे हुआ विवाद?
यह प्रोजेक्ट 2006 में शुरू हुआ था। शुरुआत में 904 यूनिट के लिए 34 टावर का नक्शा पास हुआ था.बाद में हिंडन एयर बेस के अधिकारियों ने आपत्ति जताई कि उनकी जमीन पर निर्माण हो रहा है, तो 2010 में नक्शा रद्द हो गया.
बिल्डर ने तब कंपाउंडिंग का रास्ता अपनाया। कोर्ट के अनुसार GDA ने 2011 में 1094 यूनिट का कंपाउंडिंग नक्शा पास कर दिया, जिससे मूल लेआउट ही बदल गया. 2015 में फिर टावर 33,34,35 में दो फ्लोर अतिरिक्त जोड़ने की मंजूरी दी गई और तीसरी कंपाउंडिंग में टावर 27, 28 और टावर 16-19 में दो फ्लोर का अवैध निर्माण कर दिया गया.
कोर्ट ने तीसरी कंपाउंडिंग को 18 दिसंबर 2024 के आदेश को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है.
Property Sansar Analysis: घर खरीदारों के लिए सबक 1. Supertech के बाद दूसरी बड़ी नजीर: 2021-22 में नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर गिराए जाने के बाद यह NCR में अवैध निर्माण पर दूसरी सबसे बड़ी कार्रवाई है.
2. कंपाउंडिंग = वैध नहीं: कई बिल्डर कंपाउंडिंग फीस देकर अवैध को वैध बना लेते हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने साफ किया है कि मास्टर प्लान और FAR उल्लंघन को कंपाउंड नहीं किया जा सकता.
3. खरीदने से पहले क्या देखें: गुलमोहर ग्रीन्स में बिल्डर ने बिना Completion Certificate के फ्लैट बेच दिए थे। इसलिए खरीदार हमेशा CC, OC, और GDA की वेबसाइट पर sanctioned plan जरूर चेक करें.
Conclusion for Property Sansar Readers: यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि RWA की एकता और कानूनी लड़ाई से बड़े बिल्डर को भी झुकाया जा सकता है.अगर आपकी सोसाइटी में भी अतिरिक्त टावर या फ्लोर बन रहे हैं तो सतर्क रहें।














